29th August 2026

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Ph.D. प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग, छात्र नेताओं व अभ्यर्थियों ने कुलपति को सौंपा 6 सूत्रीय ज्ञापन

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CG News : Ph.D. प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग, छात्र नेताओं व अभ्यर्थियों ने कुलपति को सौंपा 6 सूत्रीय ज्ञापन

Media Yodha Desk Sat, Aug 29, 2026

बिलासपुर। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में DET-2026(PhD) प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने की मांग को लेकर Ph.D. अभ्यर्थियों एवं छात्र प्रतिनिधियों ने कुलपति प्रो. एलपी पटेरिया से मुलाकात कर 6 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में शोध सीटों में आरक्षण रोस्टर की स्पष्टता, दावा-आपत्तियों के निराकरण एवं संशोधित उत्तर कुंजी की जानकारी वेबपटल पर सार्वजनिक करने, Ph.D. प्रक्रिया की पूर्व निर्धारित समय-सारणी जारी करने, Exempted Category एवं फेलोशिप प्राप्त अभ्यर्थियों के लिए समयबद्ध प्रवेश प्रक्रिया, गाइड/को-गाइड व्यवस्था में शोधार्थियों के हितों की सुरक्षा तथा डिस्क्वालीफाइड अभ्यर्थियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जाने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।
अभ्यर्थियों ने कहा कि DET-2026 के परिणाम जारी होने के बाद प्राप्तांकों एवं दावा-आपत्तियों के निराकरण को लेकर अभ्यर्थियों में कई स्तर पर असमंजस है। ऐसे में परीक्षा में प्राप्त आपत्तियों की संख्या, उनके मान्य-अमान्य निराकरण तथा मान्य आपत्तियों के आधार पर उत्तर कुंजी में किए गए बदलाव की जानकारी सार्वजनिक किया जाना आवश्यक है जिससे अभ्यर्थियों के बीच की भ्रांतियां दूर हो।
छात्रों ने अवगत कराया कि विश्वविद्यालय के वेबपटल से वर्ष 2023 से पूर्व आयोजित Ph.D. प्रवेश परीक्षाओं से संबंधित जानकारियां हटा दी गई हैं। इसके कारण वर्तमान प्रवेश प्रक्रिया की पूर्व की प्रवेश प्रक्रियाओं, आरक्षण व्यवस्था, शोध सीटों के वर्गीकरण एवं अन्य निर्धारित नियमों से तुलना कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है। अतः प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ संबंधित मामलों में जिम्मेदारी निर्धारित किया जाना भी अत्यंत आवश्यक है।

छात्र प्रतिनिधियों के अनुसार, कुलपति प्रो. पटेरिया ने मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वस्त किया कि Ph.D. प्रवेश प्रक्रिया में निर्धारित नियमों के अनुरूप संपूर्ण आरक्षण रोस्टर का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, डिस्क्वालीफाइड अभ्यर्थियों के नाम सार्वजनिक होने से विद्यार्थियों में अनावश्यक मानसिक तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो, इस मांग पर नाम के स्थान पर केवल रोल नंबर एवं प्राप्तांक प्रकाशित करने को लेकर भी सहमति बनी।

छात्र नेता सूरज सिंह राजपूत ने बताया कि कुलपति ने दावा-आपत्तियों के संबंध में भी सकारात्मक आश्वासन दिया है, उन्होंने कहा कि व्यापम की प्रक्रिया की तर्ज पर मान्य दावा-आपत्तियों के निराकरण तथा उनके कारण प्रश्नों/उत्तर कुंजी में किए गए परिवर्तनों की जानकारी विधिवत विश्वविद्यालय के वेब पटल पर प्रकाशित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
राजपूत ने बताया कि Ph.D. प्रवेश प्रक्रिया से लेकर कोर्स वर्क, शोध कार्य, परीक्षा एवं परिणाम तक के लिए पूर्व निर्धारित समय-सारणी जारी करने की मांग पर भी सकारात्मक सहमति बनी, जिससे शोधार्थियों का समय अनावश्यक प्रशासनिक विलंब से प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में Ph.D. प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है, ऐसे में अभ्यर्थियों के हित में पारदर्शिता एवं समयबद्धता अत्यंत आवश्यक है। कुलपति ने सभी मांगों को संबंधित विभागों एवं अधिकारियों के समक्ष विचारार्थ रखने तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया है। साथ ही छात्रों ने समस्याओं की जांच कर संबंधित पर कारवाई करने की मांग भी रखी।

इस दौरान सूरज सिंह राजपूत, नीरज यादव, रुद्र पटेल, शिवांश शर्मा, अक्षत एवं अन्य छात्र शामिल रहे

छात्रों की 6 प्रमुख मांगें, ऐसे समझें -

1. वर्गवार शोध सीटों एवं आरक्षण रोस्टर के संबंध में स्पष्टता प्रदान की जाए।
2. दावा-आपत्तियों के निराकरण की विषयवार जानकारी, आपत्तियों के निराकरण की सूचना अभ्यर्थियों को किस माध्यम से दी गई, जिन विशेषज्ञों/विशेषज्ञ समिति द्वारा आपत्तियों का परीक्षण एवं निराकरण किया गया, उसकी संपूर्ण प्रक्रिया की जानकारी तथा संशोधित उत्तर कुंजी को वेबपटल पर सार्वजनिक करने की मांग।
3. प्रवेश प्रक्रिया एवं शोध कार्यों हेतु पूर्व निर्धारित समय-सारणी जारी करने की मांग।
4. छूट प्राप्त (Exempted Category) एवं अनुदान प्राप्त छात्रों के लिए शैक्षणिक वर्ष में दो बार Ph.D. प्रवेश आयोजित किए जाने की मांग।
5. गाइड एवं को-गाइड निर्धारित करते समय UGC के प्रचलित मानकों को विशेष रूप से ध्यान में रखे जाने की मांग।
6. छात्रों में अनावश्यक तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो, इसलिए डिसक्वालिफाइड अभ्यर्थियों के नामों की सूची सार्वजनिक न करने की मांग। (उदाहरणतः बोर्ड एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसी स्थितियां कई बार देखने को मिलती हैं।)

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