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सार्वजनिक जगह पर पेशाब किया तो लगेगा ₹500 जुर्माना : कचरा फैलाने वालों पर भी सख्त एक्शन; सरकार ला रही नया बिल

Media Yodha Desk Sun, Mar 29, 2026

भारत सरकार नया बिल लाने की तैयारी में है, जिसके तहत सार्वजनिक जगहों पर पेशाब करने वाले लोगों पर 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। अगर संसद में जन विश्वास बिल, 2025 पास हो जाता है, तो जो लोग पब्लिक में पेशाब करते हुए या सड़कों पर बदबूदार कचरा डालकर परेशानी खड़ी करते हुए पकड़े जाएंगे, उन पर दस गुना यानी 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1957 के तहत अभी पब्लिक में पेशाब करने पर 50 रुपये का जुर्माना लगता है।

शुक्रवार को लोकसभा में कॉमर्स और इंडस्ट्री राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने जन विश्वास (अमेंडमेंट ऑफ प्रोविजन्स) बिल, 2026 पेश किया। इसमें दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1957 में कई बदलावों का प्रस्ताव है।

चाय दुकानों में भी जुर्माने का प्रस्ताव

इस एक्ट के सेक्शन 397(1) के तहत प्रस्तावित बदलाव, पब्लिक में पेशाब करने, शोर मचाकर पब्लिक शांति भंग करने, या कमिश्नर से बिना लिखी इजाजत के रात की गंदगी, गोबर, खाद या कचरा जमा करने जैसे कामों के लिए मौजूदा जुर्माने की जगह ज्यादा सजा का प्रावधान करता है। इस बदलाव में सिविक बॉडी के लिए एक और सख्त कदम का प्रस्ताव है। बिना लाइसेंस या लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने पर लॉजिंग हाउस, ईटिंग जॉइंट और चाय की दुकानें चलाने पर जुर्माना लगाने का भी प्रस्ताव है। इस जुर्म के लिए अभी 100 रुपये का जुर्माना है, जिसे सेक्शन 421 के तहत 1,000 रुपये के जुर्माने में बदला जाएगा, जो अनरेगुलेटेड कमर्शियल एक्टिविटी पर सख्त रुख का संकेत है।

कुत्ता खुला छोड़ने पर भी सख्त एक्शन

कुत्ते को बिना पट्टे के पब्लिक सड़क पर घूमने के लिए छोड़ने पर 50 रुपये का जुर्माना है, अब इसे 1000 रुपये करने का प्रस्ताव है। गंदगी या प्रदूषित चीज न हटाने पर, जिस पर पहले मामूली 50 रुपये का जुर्माना लगता था, अब पहले चेतावनी दी जाएगी और फिर बार-बार उल्लंघन करने पर 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। इस बिल के आने से कई नियम पूरी तरह से हट जाएंगे। इनमें सबसे अहम सेक्शन 337(4) है, जिसके तहत बिना नोटिस के बिल्डिंग का काम शुरू करने पर 10,000 रुपये और हर दिन के लिए 500 रुपये का जुर्माना देना होता था। इस नियम को पूरी तरह से हटा दिया गया है।

अपराध की श्रेणी से हटेगा सेक्शन 387

प्रस्तावित कानून में सेक्शन 387 को अपराध की श्रेणी से हटाने का प्रस्ताव है, जिसके तहत बिना नोटिस के गैरहाजिर रहने वाले म्युनिसिपल स्वीपर को एक महीने तक की जेल हो सकती है और इसकी जगह 500 रुपये की सिविल पेनल्टी लगाई गई है। नए विधेयक में सेक्शन 461A के जरिए, ज्यादातर उल्लंघनों का फैसला क्रिमिनल कोर्ट से हटाकर असिस्टेंट कमिश्नर रैंक से नीचे के म्युनिसिपल ऑफिसर को सौंप दिया गया है, जिसमें 30 दिन की अपील विंडो और छह महीने की निपटान की डेडलाइन होगी।

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