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तमिलनाडु की राजनीति में हलचल : एस गुरुमूर्ति बोले- ‘गलत सलाह’ ने विजय का बिगाड़ा पूरा गेम

Media Yodha Desk Sat, May 9, 2026

चेन्नई: तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी सियासी हलचल के बीच राजनीतिक विश्लेषक एस गुरुमूर्ति ने TVK प्रमुख विजय की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि विजय 'गलत सलाह' के चलते ऐसी स्थिति में फंस गए, जिसने पूरे घटनाक्रम को जटिल बना दिया. गुरुमूर्ति के मुताबिक, विजय को पहले राज्यपाल के सामने सिंगल लार्जेस्ट पार्टी होने के नाते दावा पेश करना चाहिए था. लेकिन उनकी ओर से कांग्रेस के समर्थन पत्र को भी शामिल करते हुए गठबंधन सरकार का दावा किया गया, जिससे स्थिति बदल गई. उन्होंने कहा कि इस कदम से मामला एकल पार्टी से हटकर गठबंधन के दावे में बदल गया, जिसके बाद राज्यपाल को बहुमत साबित करने के लिए 118 विधायकों के समर्थन की स्पष्ट सूची मांगनी पड़ी.

संख्याओं का गणित बना उलझन

गुरुमूर्ति ने बताया कि विजय ने 120 विधायकों के समर्थन का दावा किया, लेकिन संलग्न दस्तावेजों में केवल 116 विधायकों का समर्थन दिखा. 232 सदस्यीय सदन में यह संख्या बहुमत से कम है और स्थिति लगभग बराबरी (टाई) की बनती है. ऐसे में राज्यपाल के लिए सरकार गठन पर फैसला लेना मुश्किल हो गया.

'कांग्रेस की शर्तों ने बदली तस्वीर'

गुरुमूर्ति का दावा है कि कांग्रेस ने बिना शर्त समर्थन देने की बजाय गठबंधन का हिस्सा बनने पर जोर दिया. उनके अनुसार, इसी वजह से समर्थन पत्र इस तरह पेश किया गया कि यह गठबंधन सरकार का दावा लगे, न कि केवल विजय की पार्टी का. उन्होंने इसे 'तकनीकी गलती' बताते हुए कहा कि यही कदम पूरे मामले को जटिल बना गया.

राज्यपाल की भूमिका पर भी टिप्पणी

गुरुमूर्ति ने कहा कि मौजूदा हालात में राज्यपाल ने तकनीकी तौर पर गलत कदम नहीं उठाया. उनके मुताबिक, 'गवर्नर को मजबूरन बहुमत का स्पष्ट प्रमाण मांगना पड़ा, क्योंकि दावा गठबंधन के रूप में पेश किया गया था.'

राजनीतिक जोड़तोड़ तेज

तमिलनाडु में जारी हालात पर उन्होंने कहा कि पर्दे के पीछे सौदेबाजी और मोलभाव तेज है. कुछ दल सार्वजनिक समर्थन दे रहे हैं, लेकिन लिखित समर्थन नहीं दे रहे. छोटे दलों की भूमिका अहम हो गई है. IUML में भी मतभेद की चर्चा है. 

विजय के सीएम बनने की संभावना

हालांकि इस पूरे ड्रामे के बावजूद गुरुमूर्ति का मानना है कि विजय के पास अभी भी सरकार बनाने का मौका है. उनके अनुसार कांग्रेस और CPM जैसे दल अंतिम समय में पीछे नहीं हटेंगे. अगर विपक्षी खेमे से कुछ विधायक टूटे, तो समीकरण बदल सकता है.

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