18th June 2026

BREAKING NEWS

दिनदहाड़े इंजीनियर से लूट, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात, 3 आरोपियों पर FIR दर्ज

सिंचाई विभाग का कर्मचारी 1 लाख रुपये लेते हिरासत में

सीएम साय ने कहा- तेज़ी से बढ़ रही रेल कनेक्टिविटी

गौ सेवा आयोग अध्यक्ष पर हमले की कोशिश, कार को मारी टक्कर; नशे में धुत दो बाइक सवार गिरफ्तार

रायपुर एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला, लैंडिंग के दौरान एयर इंडिया विमान से टकराया पक्षी

Advertisment

Screen Time Effects : सावधान! क्या आपको भी है 'ब्रेन रॉट' की बीमारी? मोबाइल की लत से कमजोर हो रही याददाश्त-एकाग्रता

Media Yodha Desk Sat, Mar 21, 2026

आजकल "ब्रेन रॉट" शब्द खूब सुनने को मिल रहा है. इसका मतलब है कि इतना ज्यादा ऑनलाइन रहना कि दिमाग पर असर पड़ने लगे. घंटों तक सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करने के बाद जो थकान, चिड़चिड़ापन या ध्यान भटकने की समस्या होती है, उसे भी इसी नाम से जोड़ा जा रहा है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह शब्द भले ही हल्का लगे, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर सच्चाई छिपी है.

लोगों को हो रही है दिक्कत

कई लोगों को अब ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होने लगी है. जो लोग पहले आराम से किताब पढ़ लेते थे, वे अब कुछ पन्नों के बाद ही ध्यान खो देते हैं. इसका एक बड़ा कारण स्मार्टफोन और लगातार मिलने वाले नोटिफिकेशन हैं, जो दिमाग को बार-बार भटकाते रहते हैं. रिसर्च बताती है कि TikTok, Instagram या YouTube Shorts जैसे प्लेटफॉर्म पर छोटे-छोटे वीडियो देखने से हमारी कंसंट्रेशन, याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकते हैं. बार-बार विषय बदलने और लगातार स्क्रॉल करने की आदत दिमाग को लंबे समय तक किसी एक चीज पर टिकने नहीं देती.

क्या कहते हैं रिसर्चर?

MIT की रिसर्चर नतालिया कोस्माइना के अनुसार, आज लोगों के लिए 20 मिनट का एक वीडियो भी देखना मुश्किल हो गया है, क्योंकि दिमाग अब छोटे-छोटे कंटेंट का आदी हो चुका है. हालांकि, लंबे समय में इसका असर कितना गंभीर होता है, इस पर अभी पूरी तरह सहमति नहीं है. कुछ रिसर्च बताते हैं कि ज्यादा स्क्रीन टाइम वाले लोगों के दिमाग के कुछ हिस्सों में बदलाव देखे गए हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि यह कारण है या परिणाम.

किन लोगों पर हुई स्टडी?

2025 में प्रकाशित एक स्टडी में 7,000 से ज्यादा बच्चों पर शोध किया गया, जिसमें पाया गया कि ज्यादा स्क्रीन टाइम से दिमाग की बाहरी परत यानी कॉर्टेक्स की मोटाई कम हो सकती है. यह हिस्सा सोचने, याद रखने और फैसले लेने में मदद करता है. इसके अलावा, ज्यादा स्क्रीन टाइम नींद पर भी असर डालता है. खासकर बच्चे और किशोर देर रात तक फोन इस्तेमाल करते हैं, जिससे उन्हें पूरी नींद नहीं मिलती. लगातार नींद की कमी से दिमाग के विकास पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि हर तरह का स्क्रीन टाइम खराब नहीं होता. फर्क इस बात से पड़ता है कि आप स्क्रीन पर क्या कर रहे हैं.

छात्रों पर क्या होता है असर?

AI चैटबॉट्स पर हुई एक स्टडी में पाया गया कि जो छात्र इनका ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, वे खुद कम सीख पाते हैं और अपनी ही लिखी चीजों को याद नहीं रख पाते. इसका कारण यह है कि दिमाग कम सक्रिय रहता है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि स्क्रीन का इस्तेमाल संतुलित तरीके से करें. सोने से पहले फोन से दूरी रखें, जरूरत से ज्यादा ऐप्स हटाएं और तकनीक का इस्तेमाल सोच-समझकर करें.

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन