7th August 2026

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रायपुर : पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे पंचतत्व में विलीन, हास्य कविता जगत में शोक की लहर

| छत्तीसगढ़ और देशभर में हास्य व्यंग्य को नई पहचान देने वाले पद्मश्री कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार को रायपुर के ACI अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया।

📍 अंतिम संस्कार अशोका रत्न मुक्तिधाम में हुआ

रायपुर के अशोका रत्न मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार भावपूर्ण वातावरण में किया गया। उनके बेटे अभिषेक दुबे ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम दर्शन के लिए परिजन, मित्र, साहित्यप्रेमी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। इस मौके पर गृह मंत्री विजय शर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, कवि कुमार विश्वास सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे और उन्होंने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।


🎤 कुमार विश्वास ने कहा – “सुरेंद्र जी के आगे सबका रुतबा छोटा लगता था”

कवि कुमार विश्वास ने कहा,

“सुरेंद्र दुबे के बिना छत्तीसगढ़ की कल्पना नहीं की जा सकती। चाहे देश हो या विदेश, वे हमेशा अपनी माटी की बात करते थे। किसी भी कवि सम्मेलन में सुरेंद्र जी का मंच पर होना बाकी सभी कवियों पर भारी पड़ता था।”


💔 "छत्तीसगढ़ ने अपना हास्य का ताज खोया है"

विधायक अनुज शर्मा ने कहा –

“डॉ. दुबे का न होना छत्तीसगढ़ के लिए बहुत बड़ा आघात है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वे परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति दें।”


📚 डॉ. सुरेंद्र दुबे का जीवन परिचय

  • जन्म: 8 जनवरी 1953, गंजपारा, बेमेतरा (छत्तीसगढ़)

  • पेशे से: आयुर्वेदाचार्य

  • पहचान: हास्य-व्यंग्य के अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकता सितारा

  • सम्मान:

    • 2008 में काका हाथरसी हास्य रत्न पुरस्कार

    • भारत सरकार से पद्मश्री

  • प्रमुख रचनाएं: पांच किताबें, अनेक कवि सम्मेलन, टेलीविजन कार्यक्रमों में हिस्सा


🌍 अंतरराष्ट्रीय पहचान

डॉ. दुबे ने छत्तीसगढ़ की महक को यूएस, कनाडा जैसे देशों तक पहुंचाया। उनकी लोकप्रिय कविताएं जैसे:

  • “दु के पहाड़ा ल चार बार पढ़, एला कहिथे छत्तीसगढ़”

  • “टाइगर अभी जिंदा है”

  • “पीएम मोदी के आने से फर्क पड़ा है”

  • अयोध्या पर: “पाँच अगस्त का सूरज राघव को लाने वाला है…”
    लोगों की जुबां पर हमेशा रहेंगी।


📸 अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब

कवि के सम्मान में मारवाड़ी मुक्तिधाम में गार्ड ऑफ ऑनर की तैयारी की गई थी, लेकिन बाद में इसे स्थगित कर दिया गया। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में रायपुर ने अपने सबसे प्यारे हास्य रचनाकार को विदाई दी

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