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सावधान : आपकी आंतों में छिपा कैंसर का खतरनाक विलेन, वैज्ञानिकों ने किया हैरान कर देने वाला खुलासा

Media Yodha Desk Fri, Mar 20, 2026

Gut Bacteria And Cancer: कैंसर के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे हैं. अब इसको अमेरिका के साइंटिस्ट ने एक अहम खोज की है, जो बताती है कि आंत में रहने वाले कुछ बैक्टीरिया किस तरह कोलन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं. यह स्टडी जर्नल साइंस में पब्लिश हुई है और इसमें पहली बार साफ तौर पर समझाया गया है कि ये बैक्टीरिया शरीर के डीएनए को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे होता है आपको कैंसर का खतरा

बैक्टीरिया कैसे पहुंचाते हैं नुकसान?

दरअसल, आंत में मौजूद कुछ बैक्टीरिया एक टॉक्सिन बनाते हैं, जिसे कोलिबैक्टिन कहा जाता है. यह टॉक्सिन खास तरह के E. coli बैक्टीरिया द्वारा बनाया जाता है. आमतौर पर ये बैक्टीरिया हमारे गट माइक्रोबायोम का हिस्सा होते हैं और डाइजेशन में मदद करते हैं, लेकिन कुछ स्थितियों में ये नुकसानदेह भी साबित हो सकते हैं. साइंटिस्ट पहले से जानते थे कि कोलिबैक्टिन डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है और इसका संबंध कोलोरेक्टल कैंसर से हो सकता है. लेकिन इस टॉक्सिन का स्टडी करना आसान नहीं था, क्योंकि यह बहुत अस्थिर होता है और जल्दी टूट जाता है.

क्या निकला नई स्टडी में?

नई स्टडी में रिसर्चर ने आधुनिक तकनीकों जैसे मास स्पेक्ट्रोमेट्री और न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस की मदद से इस टॉक्सिन को विस्तार से समझा. उन्होंने पाया कि कोलिबैक्टिन डीएनए को रैंडम तरीके से नहीं, बल्कि खास हिस्सों पर निशाना बनाता है. यह टॉक्सिन डीएनए के उन हिस्सों पर असर करता है, जहां एडेनिन और थाइमिन ज्यादा मात्रा में मौजूद होते हैं. कोलिबैक्टिन डीएनए की दोनों स्ट्रैंड्स को आपस में जोड़ देता है, जिसे वैज्ञानिक "इंटरस्ट्रैंड क्रॉस-लिंक" कहते हैं. इससे डीएनए सही तरह से कॉपी या रिपेयर नहीं हो पाता, जो कैंसर का कारण बन सकता है.

क्यों जरूरी है यह रिसर्च?

रिसर्च में यह भी सामने आया कि यह टॉक्सिन डीएनए के माइनर ग्रूव नाम के हिस्से में जाकर चिपकता है. इसकी केमिकल बनावट ऐसी होती है कि यह बिल्कुल सही जगह फिट होकर ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है. साइंटिस्ट ने इसे "लॉक-एंड-की" मैकेनिज्म जैसा बताया है. यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कोलोरेक्टल कैंसर के मरीजों में एक जैसे डीएनए बदलाव क्यों दिखाई देते हैं.

टेस्ट डिवेलप करने की तैयारी

एक्सपर्ट का मानना है कि भविष्य में इस जानकारी के आधार पर ऐसे टेस्ट विकसित किए जा सकते हैं, जो आंत में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया की पहचान कर सकें. इसके साथ ही, ऐसे इलाज भी संभव हो सकते हैं जो इस टॉक्सिन को बनने से रोकें या डीएनए से जुड़ने से पहले ही खत्म कर दें. इसके अलावा, डाइट, प्रोबायोटिक्स और अन्य तरीकों से गट माइक्रोबायोम को संतुलित कर जोखिम कम करने की दिशा में भी काम किया जा सकता है.

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