8th August 2026

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महासमुंद : महासमुंद के किसानों की खाद को लेकर बढ़ी चिंता, डीएपी और एनपीके दोनों की कमी

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही जिले के हजारों किसान धान की खेती की तैयारी में जुट गए हैं, लेकिन सरकारी समितियों में खाद की कमी उनकी चिंता बढ़ा रही है। किसानों के अनुसार धान की फसल के लिए सबसे ज़्यादा जरूरत डीएपी (डायमोनियम फॉस्फेट) खाद की है, लेकिन इसकी उपलब्धता बेहद सीमित है। प्रशासन ने DAP की जगह NPK (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश) खाद देने का विकल्प सुझाया है, लेकिन वर्तमान में एनपीके भी समितियों में नहीं मिल पा रही है।

क्यों है खाद की किल्लत?

जिले में करीब 1 लाख 62 हजार पंजीकृत किसान हैं, जो इस खरीफ सीजन में 2 लाख 47 हजार हेक्टेयर में धान की फसल बोएंगे। इसके लिए 66 हजार टन खाद की ज़रूरत होगी, जिसमें यूरिया, पोटाश, राखड़ और डीएपी शामिल हैं। प्रशासन द्वारा 15 हजार टन खाद का भंडारण किया गया है, लेकिन अभी 51 हजार टन खाद की जरूरत शेष है।

डीएपी का कोटा भी घटा

पिछले साल की तुलना में इस बार डीएपी खाद का लक्ष्य घटाकर 5 हजार टन कर दिया गया, जिसमें से सिर्फ 2 हजार टन खाद ही जिले को मिल सका। बाकी किसानों को एनपीके खाद देने की योजना है, लेकिन यह खाद भी समितियों में मौजूद नहीं है। इससे किसानों में चिंता बढ़ रही है।

किसानों की चिंता व मांग

किसानों का कहना है कि धान की फसल में शुरुआती दौर में डीएपी खाद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। अगर समय पर खाद नहीं मिली तो फसल पर विपरीत असर पड़ेगा और उत्पादन कम हो सकता है। किसानों ने प्रशासन से जल्द खाद उपलब्ध कराने की मांग की है।

प्रशासन का भरोसा

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही खाद की आपूर्ति बहाल की जाएगी ताकि किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। साथ ही वैकल्पिक रूप से NPK खाद उपलब्ध कराने के प्रयास भी जारी हैं

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