नई दिल्ली : मेडिकल कॉलेजों में फर्जी मान्यता का बड़ा घोटाला, CBI ने 6 लोगों को किया गिरफ्तार, संत-महात्मा भी शक के घेरे में
जुलाई 2025 — देश में जनकल्याण के नाम पर मेडिकल कॉलेज खोलने वाले सफेदपोशों और संत महात्माओं की सच्चाई अब उजागर हो चुकी है। हाल ही में सीबीआई ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए ऐसे मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है जो रिश्वत देकर फर्जी मान्यता हासिल कर देशभर के छात्रों को नकली डिग्री बांट रहे थे।
अब तक 6 गिरफ्तार, कई राज्यों में चल रही छापेमारी
CBI ने इस मामले में तीन डॉक्टरों समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में छापेमारी की जा रही है। कुल मिलाकर इस मामले में 35 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें कई मेडिकल कॉलेज संचालक, दलाल और सरकारी अफसर शामिल हैं।
करोड़ों में होती थी डील, मेडिकल कॉलेजों को दी जाती थी फर्जी मान्यता
सीबीआई की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कई कॉलेज बिना बुनियादी ढांचे, फैकल्टी और अस्पताल के चल रहे थे। लेकिन रिश्वत के बदले पॉजिटिव इंस्पेक्शन रिपोर्ट देकर उन्हें मान्यता दिलाई गई। यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से जारी था, और अब जाकर इसका पर्दाफाश हुआ है।
इन कॉलेजों से हजारों छात्रों को एमबीबीएस और अन्य मेडिकल डिग्रियां दी जा चुकी हैं, जिनकी प्रमाणिकता पर अब सवाल उठ खड़े हो गए हैं। इस घोटाले में शामिल कॉलेजों की संख्या आधा दर्जन से ज्यादा बताई जा रही है।
संत और धर्मगुरु भी शक के घेरे में, रावतपुरा सरकार का नाम आया सामने
इस घोटाले में मध्य प्रदेश के चर्चित संत रविशंकर महाराज उर्फ रावत सरकार और स्वामी भक्त वसल दास महाराज के नाम भी सामने आए हैं। दोनों ही रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज से जुड़े हुए हैं। सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इन संतों ने कॉलेजों को फर्जी मान्यता दिलाने के लिए रिश्वत डील में भूमिका निभाई।
बताया जा रहा है कि इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के संचालक सुरेश भदौरिया द्वारा यह डील कराई गई थी, जिसमें नया रायपुर स्थित रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज को फायदा पहुंचाया गया।
40 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी, अरबों की हेराफेरी की आशंका
सीबीआई फिलहाल देशभर में 40 से ज्यादा स्थानों पर छापेमारी कर रही है। इनमें अधिकांश ठिकाने मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के हैं। सूत्रों की मानें तो इस फर्जीवाड़े के जरिए पिछले कुछ सालों में अरबों रुपये की रिश्वत ली और दी गई है।
कुछ आरोपी भूमिगत हो चुके हैं, जबकि कई अपनी राजनीतिक और धार्मिक पहुंच के जरिए जांच से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
कैसे खुला घोटाला? छत्तीसगढ़ के रावतपुरा मेडिकल कॉलेज से शुरू हुई जांच
इस सनसनीखेज घोटाले की शुरुआत छत्तीसगढ़ के नया रायपुर से हुई, जहां रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज ने नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) की टीम को रिश्वत की पेशकश की थी। इसके बदले में कॉलेज को सकारात्मक निरीक्षण रिपोर्ट देने की बात की गई थी। यही डील CBI की नजर में आ गई और पूरे देशभर में चल रहे इस गोरखधंधे का भंडाफोड़ हो गया
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन