केन्द्र सरकार : उपभोक्ताओं को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाने के लिए भारत सरकार की पहल
भारत सरकार उपभोक्ताओं को डार्क पैटर्न (Dark Patterns) के जरिए होने वाली धोखाधड़ी से बचाने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। ये डार्क पैटर्न ऐसे डिज़ाइन और तरीके होते हैं जो उपभोक्ताओं को गुमराह करते हैं या उन पर दबाव डालते हैं, ताकि वे ऐसे विकल्प चुनें जो उनके हित में न हों। इनमें झूठी तात्कालिकता, छिपे हुए विज्ञापन, और धोखे जैसी कई तरह की हेरफेर शामिल हैं।
उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई
डार्क पैटर्न को उपभोक्ता संरक्षण कानून, 2019 की धारा 2 की उप-धारा 47 में परिभाषित "अनुचित व्यापार तरीकों" की श्रेणी में रखा गया है। इस कानून के तहत, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) को उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने का अधिकार है।
डार्क पैटर्न को रोकने के लिए दिशानिर्देश
CCPA ने 30 नवंबर, 2023 को "डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन हेतु दिशानिर्देश, 2023" जारी किए। इन दिशानिर्देशों में ई-कॉमर्स क्षेत्र में 13 विशिष्ट डार्क पैटर्न की पहचान की गई है, जिनमें शामिल हैं:
* झूठी तात्कालिकता (False Urgency): जैसे "केवल 2 पीस बचे हैं!"
* बास्केट स्नीकिंग (Basket Sneaking): आपकी अनुमति के बिना कार्ट में अतिरिक्त आइटम जोड़ना।
* कन्फर्म शेमिंग (Confirm Shaming): आपको ऐसा महसूस कराना कि यदि आप कोई विशिष्ट कार्रवाई नहीं करते हैं तो आप शर्मिंदा होंगे।
* जबरन कार्रवाई (Forced Action): आपको कोई आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मजबूर करना।
* सब्सक्रिप्शन ट्रैप (Subscription Trap): सब्सक्रिप्शन रद्द करना मुश्किल बनाना।
* इंटरफ़ेस इंटरफेरेंस (Interface Interference): इंटरफ़ेस को भ्रामक बनाना।
* बैट एंड स्विच (Bait and Switch): एक चीज़ का विज्ञापन करके दूसरी बेचना।
* ड्रिप प्राइसिंग (Drip Pricing): शुरुआत में कम कीमत दिखाना और चेकआउट पर अतिरिक्त शुल्क जोड़ना।
* प्रच्छन्न विज्ञापन (Disguised Advertising): विज्ञापन को सामान्य सामग्री जैसा दिखाना।
* सता (Nagging): बार-बार परेशान करने वाले पॉप-अप।
* ट्रिक वर्डिंग (Trick Wording): भ्रामक शब्दों का प्रयोग।
* सास बिलिंग (SaaS Billing): अवांछित आवर्ती शुल्क।
* दुष्ट मैलवेयर (Rogue Malware): मैलवेयर के माध्यम से धोखे।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए एडवाइजरी और स्व-ऑडिट
28 मई, 2025 को, उपभोक्ता कार्य विभाग ने प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों, उद्योग संघों और उपभोक्ता संगठनों के साथ एक बैठक बुलाई। इस बैठक के परिणामस्वरूप, CCPA ने 5 जून, 2025 को एक एडवाइजरी जारी की।
इस एडवाइजरी में सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को सलाह दी गई है कि:
* वे अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे भ्रामक और अनुचित व्यापार व्यवहारों में शामिल न हों जो डार्क पैटर्न की प्रकृति के हैं।
वे एडवाइजरी जारी होने के तीन महीने के भीतर डार्क पैटर्न की पहचान करने के लिए *स्व-ऑडिट (Self-Audit)** करें।
स्व-ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर, उन्हें यह *स्व-घोषणा (Self-Declaration)** भी देनी होगी कि उनका प्लेटफॉर्म किसी भी डार्क पैटर्न में लिप्त नहीं है।
संयुक्त कार्य समूह का गठन
इसके अलावा, 5 जून, 2025 को एक संयुक्त कार्य समूह का गठन किया गया है, जिसमें मंत्रालयों, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों और स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह कार्य समूह डार्क पैटर्न की पहचान करने और एक पारदर्शी, नैतिक और उपयोगकर्ता-केंद्रित ऑनलाइन वातावरण बनाने के लिए हितधारकों के साथ मिलकर काम करेगा।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। ये कदम उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने और ऑनलाइन व्यापार में निष्पक्षता को बढ़ावा देने की दिशा में भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन