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घर-ज़मीन खरीदना हुआ सस्ता : सरकार ने खत्म किया 0.60% सेस, बजट पर पड़ेगा सीधा असर

Media Yodha Desk Sat, Mar 21, 2026

रायपुर : छत्तीसगढ़ में अपना घर बनाने या जमीन खरीदने का सपना देख रहे मध्यमवर्गीय परिवारों और किसानों के लिए साथ सरकार ने बड़ी राहत दी है. शुक्रवार को विधानसभा ने ‘छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया. अब अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60% सेस को खत्म कर दिया गया है.

वाणिज्यिक कर मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि इस फैसले से जनता पर पड़ने वाला सालाना 460 करोड़ का बोझ कम होगा. 2023 में पूर्व कांग्रेस सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन’ और ‘राजीव गांधी मितान क्लब’ के संचालन के लिए स्टाम्प शुल्क पर 0.60% सेस लगाया था. चूंकि अब ‘मितान क्लब’ अस्तित्व में नहीं है और रोजगार योजनाओं का खर्च सामान्य बजट से दिया जा रहा है, इसलिए जनता पर यह “अनावश्यक बोझ लादे रखने का कोई औचित्य नहीं था.

राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में वर्गमीटर आधारित मूल्यांकन को खत्म कर फिर से हेक्टेयर दर लागू कर दी है. इससे छोटे जमीन मालिकों को 300 से 400 करोड़ रुपए का लाभ होगा. साथ ही, कृषि भूमि पर ढाई गुना मूल्यांकन और पेड़ों के अलग से मूल्यांकन जैसे जटिल नियमों को भी विदा कर दिया गया है. जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक किफायती होगी.

आम जनता को मिलेगी राहत-चौधरी

ओपी चौधरी ने बताया कि आम जनता को इससे बड़ी राहत मिलेगी. पंजीयन विभाग को अब ‘वीजा ऑफिस’ की तर्ज पर स्मार्ट बनाया जा रहा है. अब रजिस्ट्री होते ही बिना भटकते अपने आप नामांतरण हो जाएगा. अब तक 1.5 लाख लोगों को लाभ मिला. सुगम एप के जरिए लोकेशन और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए आधार आधारित सत्यापन अनिवार्य हो गया है. इसी तरह 10 कार्यालयों को पीपीपी मोड पर वातानुकूलित और वाई-फाई युक्त बनाया जा रहा है.

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई ऊर्जा – साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आम नागरिक, किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े. यह निर्णय केवल कर में राहत नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के सपनों को सम्मान देने की दिशा में एक सार्थक पहल है, जो अपनी मेहनत की कमाई से घर और जमीन खरीदते हैं. इस कदम से संपत्ति के पंजीयन में वृद्धि होगी, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई ऊर्जा प्राप्त होगी.

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