20th June 2026

BREAKING NEWS

चरित्र शंका में पति बना हैवान, पत्नी का मुंडन कर जबरन पिलाया पेशाब, आरोपी पुलिस गिरफ्त में

23 जिलों में 31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण

बलौदाबाजार हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, छत्तीसगढ़ सरकार से मांगा जवाब

NEET 2026 अभ्यर्थियों को रेलवे की बड़ी सौगात, 10 ट्रेनों में लगाए गए 40 अतिरिक्त जनरल कोच

रेल यात्रियों को बड़ा झटका! छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली कई ट्रेनें रद्द, सफर से पहले देखें पूरी लिस्ट

Advertisment

CBSE का बड़ा फैसला : 2026-27 से कक्षा 6 में लागू होगी नई भाषा नीति, तीन भाषाएं पढ़ना होगा अनिवार्य

Media Yodha Desk Fri, Feb 27, 2026

देशभर के सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों और अभिभावकों के लिए एक अहम खबर सामने आई है. CBSE ने 2026-27 सत्र से कक्षा 6 से नई भाषा नीति लागू करने का फैसला किया है. इस नई व्यवस्था के तहत अब छात्रों को कक्षा 6 से तीन भाषाएं पढ़नी होंगी. यह फैसला नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है. नई नीति के अनुसार, कक्षा 6 से छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय होंगी. तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी को अब विदेशी भाषा माना जाएगा. यानी अंग्रेजी पहले जैसी मुख्य भाषा नहीं रहेगी, बल्कि उसे विदेशी भाषा की श्रेणी में रखा जाएगा. अगर कोई स्कूल फ्रेंच, जर्मन या किसी और विदेशी भाषा को पढ़ाता है, तब भी दो भारतीय भाषाएं पढ़ाना जरूरी होगा.

क्या बदलेगा छात्रों के लिए?

अब तक ज्यादातर स्कूलों में दो भाषाएं ही अनिवार्य होती थीं. नई नीति के बाद छात्रों को एक अतिरिक्त भाषा सीखनी होगी. इससे पढ़ाई का दायरा बढ़ेगा, लेकिन साथ ही छात्रों को नई भाषाएं सीखने और समझने का अवसर भी मिलेगा. सीबीएसई का मानना है कि इससे बच्चों की सोच विकसित होगी और वे अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों को समझ पाएंगे.

कक्षा 10 तक जारी रह सकती है तीसरी भाषा

नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क की सिफारिश है कि तीनों भाषाओं की पढ़ाई कक्षा 9 और 10 तक जारी रखी जाए. सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में भी तीसरी भाषा को शामिल किया जा सकता है. संभावना है कि साल 2031 में होने वाली 10वीं की बोर्ड परीक्षा में छात्रों को तीसरी भाषा का पेपर भी देना पड़े.

नई किताबें और नया सिलेबस

सीबीएसई इस बदलाव के साथ नई किताबें और नया सिलेबस भी तैयार करेगा. यह तय किया गया है कि छात्रों को तीसरी भाषा में कितनी जानकारी और कितनी समझ विकसित करनी है. इसके लिए अलग-अलग स्तर पर पढ़ाई का ढांचा तैयार किया जा रहा है. 2026-27 सत्र के लिए कक्षा 6 की तीसरी भाषा की पढ़ाई नौ भारतीय भाषाओं में शुरू करने की तैयारी है. इनमें तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, गुजराती, बांग्ला जैसी भाषाएं शामिल हैं.

तीसरी भाषा को क्यों दिया जा रहा है ज्यादा समय?

नई व्यवस्था में कक्षा 6 से 8 को मिडिल स्टेज माना गया है. इस दौरान तीसरी भाषा की पढ़ाई शुरू की जाएगी और इसे सीखने के लिए छात्रों को पर्याप्त समय दिया जाएगा. सीबीएसई का कहना है कि तीसरी भाषा कई छात्रों के लिए पूरी तरह नई हो सकती है. इसलिए इसे समझने, बोलने और लिखने के लिए अभ्यास और समय जरूरी है.

भाषा से जुड़ेगी संस्कृति और पहचान

करिकुलम फ्रेमवर्क के अनुसार, भाषा केवल पढ़ाई का विषय नहीं है, बल्कि यह संस्कृति और समाज से जुड़ने का जरिया भी है. भारत में कई समृद्ध भाषाएं हैं और हर भाषा की अपनी अलग पहचान है. जब छात्र एक से ज्यादा भारतीय भाषाएं सीखेंगे, तो वे देश की विविधता को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे. इससे उनमें एकता की भावना भी मजबूत होगी.

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन