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काम की बात : 15 साल पुरानी कार अब नहीं होगी बेकार, इंजन बदलकर दोबारा सड़क पर दौड़ेगी; सरकार खर्चा भी देगी

Media Yodha Desk Wed, Apr 15, 2026

नई दिल्ली : केंद्र सरकार स्क्रैप पॉलिसी के तहत पुराने वाहनों को कबाड़ घोषित करने के बजाय उन्हें इलेक्ट्रिक अथवा क्लीन फ्यूल (सीएनजी-एलएनजी) में बदलने (रिट्रोफिटमेंट) का अवसर प्रदान करने पर विचार कर रही है। सरकार का मानना है कि 10 और 15 साल पुराने वाहन जो तकनीकी रूप से फिट हैं, ऐसे वाहनों को पूरी तरह से स्क्रैप करने के बजाय इंजन में बदलाव कर उपयोग में लाना समझदारी होगी। इससे करोड़ों निजी और व्यावसायिक वाहन मालिकों को राहत मिलेगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में शीर्ष स्तर पर स्क्रैपेज पॉलिसी में बदलाव लाने पर गंभीरता से विचार चल रहा है।

मंत्रालय प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसके तहत व्यावसायिक वाहनों (ट्रक, बस, टेम्पो, ट्रेवलर) को इलेक्ट्रिक किट से लैस करने पर आने वाली लागत का 15 से 25 फीसदी हिस्सा सरकार वहन कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में रिट्रोफिटमेंट एक महंगा और जटिल काम है। नई नीति के तहत मंत्रालय देशभर में अधिकृत रिट्रोफिटमेंट सेंटर का नेटवर्क तैयार करेगा, जहां से प्रमाणित किट लगवाने पर ही फिटनेस सर्टिफिकेट को अगले पांच वर्षों के लिए नवीनीकृत किया जा सकेगा।

नई नीति की घोषणा जल्द

विशेषज्ञों का दावा है कि स्क्रैप पॉलिसी की सुस्त रफ्तार को देखते हुए रिट्रोफिटमेंट को बढ़ावा देना ही सरकार के समक्ष एकमात्र व्यावहारिक विकल्प बचा है। वहीं, ट्रांसपोर्ट यूनियनों की ओर से लगातार पुराने वाहनों को पूरी तरह खत्म करने के बजाय लाइफ एक्सटेंशन (जीवन विस्तार) का मौका देने की मांग लगातार उठ रही है। निजी निवेशकों ने स्क्रैपेज सेंटर खोलने में रुचि नहीं दिखाई। यही कारण है कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा इलेक्ट्रिक रिट्रोफिटमेंट किट्स के लिए मानक तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार नई नीति की जल्द घोषणा कर सकती है।

मध्यम वर्ग को राहत मिलने की उम्मीद

सरकार के इस प्रस्ताव से मध्यम वर्ग और ट्रांसपोर्टर्स को भारी राहत मिलेगी। स्क्रैपेज पॉलिसी के कारण छोटे ट्रांसपोर्टर्स पर नया वाहन खरीदने का भारी आर्थिक बोझ है। रिट्रोफिटमेंट की लागत नए वाहन की तुलना में मात्र 30-40 फीसदी होती है। इससे एक तरफ प्रदूषण कम होगा और दूसरी तरफ देश में रिट्रोफिटमेंट इंडस्ट्री के रूप में हजारों नए रोजगार पैदा होंगे। हालांकि, सरकार की सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा मानकों को लेकर है। पुराने चेचिस पर भारी बैटरी पैक का वजन और ब्रेकिंग सिस्टम का तालमेल कैसे बैठेगा।

लगभग 2.44 करोड़ से अधिक वाहन

आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 2.44 करोड़ से अधिक वाहन (30 लाख ट्रैक्टर सहित) ऐसे हैं, जो स्क्रैपेज पॉलिसी के मानकों (15-20 साल पुराने) के दायरे में आते हैं।

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