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Chhattisgarh : बिना रॉयल्टी क्लीयरेंस अब नहीं होगा निर्माण कार्य, सरकार ने जारी की सख्त गाइडलाइन

Media Yodha Desk Sat, May 23, 2026

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने निर्माण कार्यों में खनिज उपयोग, रॉयल्टी क्लीयरेंस और जीएसटी भुगतान व्यवस्था को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में एक समान प्रक्रिया लागू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि इससे भुगतान संबंधी विवाद कम होंगे और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी। जारी आदेश के अनुसार अब निर्माण कार्यों के एस्टीमेट और पीएसी (प्रारंभिक लागत विवरण) तैयार करते समय सामग्री दरों में जीएसटी शामिल नहीं किया जाएगा। बाद में ठेका प्रक्रिया पूरी होने और भुगतान के समय लागू जीएसटी अलग से जोड़ा जाएगा।

विभाग का मानना है कि इससे टैक्स निर्धारण की प्रक्रिया स्पष्ट और एकरूप होगी। सरकार ने खनिज उपयोग को लेकर भी सख्ती बढ़ा दी है। नए नियमों के तहत यदि किसी निर्माण एजेंसी या ठेकेदार द्वारा रॉयल्टी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो उसे खनिज मूल्य के साथ अतिरिक्त पेनल्टी भी चुकानी होगी। विभाग ने इसकी गणना का फार्मूला भी तय कर दिया है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी खनिज की रॉयल्टी ₹100 है, तो जिला खनिज न्यास यानि डीएमएफ, पर्यावरण उपकर और अधोसंरचना विकास उपकर जोड़ने के बाद उसकी कुल खनिज लागत ₹152.50 मानी जाएगी। वहीं यदि खनिज का उपयोग बिना वैध प्रमाण पत्र के किया जाता है, तो ₹100 अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा।

इस स्थिति में कुल देय राशि बढ़कर ₹252.50 हो जाएगी। आदेश में यह भी साफ कहा गया है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ठेकेदारों को भुगतान करते समय कुल राशि में लागू जीएसटी अलग से जोड़ा जाएगा। विभाग का दावा है कि इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और कर निर्धारण में भ्रम की स्थिति समाप्त होगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी शहरी निकायों और विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद जारी होने वाले सभी नए टेंडरों में इन नियमों का अनिवार्य रूप से पालन कराया जाए। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से अवैध खनिज उपयोग पर रोक लगेगी और राजस्व संग्रह प्रणाली मजबूत होगी।

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