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Bilaspur High court : छत्तीसगढ़ में 17 कलेक्टरों को हाईकोर्ट का अंतिम मौका, फायर स्टेशन मामले में जवाब न देने पर सख्ती

Media Yodha Desk Tue, May 5, 2026

Bilaspur High court: छत्तीसगढ़ में अग्नि दुर्घटना से निपटने के संसाधन पर्याप्त न होने पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है। सुनवाई में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने प्रदेश के 17 कलेक्टरों को निदेशक अग्नि सुरक्षा के पत्र का जवाब देने के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया है। पत्र में निदेशक अग्नि सुरक्षा ने इन 17 जिला मुख्यालय में फायर स्टेशन बनाने के लिए उपयुक्त जमीन आवंटन की मांग की थी। उल्लेखनीय है कि 17 मार्च 2026 को हुई सुनवाई के पश्चात निदेशक अग्नि सुरक्षा ने हाईकोर्ट के आदेश के परिपालन में 25 मार्च 2026 को यह पत्र भेजा था। इसका कोई उत्तर ना आने पर 27 अप्रैल को रिमाइंडर भी सभी 17 कलेक्टरों को भेजा गया फिर भी आज तक इसका कोई जवाब नहीं आया है।

पत्र में रायपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, नारायणपुर, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, सुकमा, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई, सारंगढ़, कोण्डागांव, बलरामपुर, बालोद, सूरजपुर, गरियाबंद, बीजापुर, सक्ती, मुंगेली एवं बेमेतरा सहित सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों से जिला सेनानी कार्यालय के समीप सुगम पहुंच मार्ग वाली भूमि का आवंटन प्राथमिकता के आधार पर करने का निवेदन किया गया है। यह पत्र निदेशक, ट्रेनिंग ऑपरेशन, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएँ, नगर सेना, तथा नागरिक सुरक्षा, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी किया गया है। समस्त जिला सेनानी एवं जिला अग्निशमन अधिकारियों को भी सूचित करने कहा गया है।

फायर स्टेशन के लिए जमीन उपलब्ध कराने के पत्र पर कार्रवाई नहीं

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने खंडपीठ को अवगत कराया कि 17 मार्च को किए गए आदेश के परिपालन में निदेशक अग्नि सुरक्षा ने त्वरित कार्यवाही करते हुए प्रदेश के 17 कलेक्टरों को फायर स्टेशन के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा था और इसे प्राथमिकता पर लेने के लिए कहा था। हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमित्र अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने खंडपीठ का शपथ पत्र के उस हिस्से की ओर ध्यान आकृष्ट कराया जिसमें राज्य सरकार ने स्वीकार किया है कि किसी भी कलेक्टर के द्वारा इस पत्र का जवाब नहीं दिया गया।

अग्नि सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति नहीं

राज्य में अग्नि सुरक्षा या अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन और मैनपॉवर नहीं है। प्रदेश के लगभग 200 से अधिक ब्लॉक मुख्यालय में से 145 से अधिक ऐसे हैं जहां पर एक भी अग्निशमन वाहन उपलब्ध नहीं हैं। राजधानी में जहां 22 ऐसे वाहन उपलब्ध है वहीं बिलासपुर में 10 वाहन ही उपलब्ध हैं। राज्य में अग्नि सुरक्षा की जिम्मेदारी 2018 के पहले स्थानीय निकायों पर होती थी परंतु बाद में राज्य विधानसभा द्वारा एक अधिनियम पारित कर इसके लिए एक नए निदेशक अग्नि सुरक्षा कार्यालय का गठन किया गया। इसके तहत प्रत्येक जिले में जिला अग्नि सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति होनी है।

पत्रों का जवाब न देने पर कोर्ट गंभीर

खंडपीठ ने पत्रों का जवाब न देने को गंभीर माना है, वहीं मामले की अगली सुनवाई 23 जून को रखी गई है। हाईकोर्ट ने आदेश की जानकारी राज्य के मुख्य सचिव को भी भेजे जाने के निर्देश दिए गए हैं जिससे कि पूरी तरह परिपालन हो सके।

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